tag:blogger.com,1999:blog-8465817.post111227295020279035..comments2007-04-18T14:13:47.158+07:00Comments on कल्पवृक्ष: हम सुधि-बुधि अपनी भूल गए ........राजेश कुमार सिंहhttp://www.blogger.com/profile/07513885073414867392noreply@blogger.comBlogger10125tag:blogger.com,1999:blog-8465817.post-1124520179306656302005-08-20T13:42:00.000+07:002005-08-20T13:42:00.000+07:00बहुत अच्छा लिखा है आपने। भारत में कहां से हैं आप?बहुत अच्छा लिखा है आपने। भारत में कहां से हैं आप?रेलगाड़ीhttp://www.blogger.com/profile/11988701220844256208noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-8465817.post-1117112492494203162005-05-26T20:01:00.000+07:002005-05-26T20:01:00.000+07:00"बन्दर लैम्पंग" पर लिखे लेख का पहला भाग यहाँ chh..."बन्दर लैम्पंग" पर लिखे लेख का पहला भाग यहाँ <A HREF="http://chhayaa.blogspot.com" REL="nofollow">chhayaa</A> पर है।राजेश कुमार सिंहhttp://www.blogger.com/profile/07513885073414867392noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-8465817.post-1116546820046303952005-05-20T06:53:00.000+07:002005-05-20T06:53:00.000+07:00विकिपीडिया हिन्दी में योगदान करना न भूलेंhi.wikipe...विकिपीडिया हिन्दी में योगदान करना न भूलें<BR/>hi.wikipedia.orgdeeptriviahttp://www.blogger.com/profile/13260950141087581334noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-8465817.post-1115859009611648242005-05-12T07:50:00.000+07:002005-05-12T07:50:00.000+07:00hum padhe aur dhyan bhee diya gaya so jaanana!hum padhe aur dhyan bhee diya gaya so jaanana!इंद्र अवस्थीhttp://www.blogger.com/profile/08625731001861201733noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-8465817.post-1113396549498363002005-04-13T19:49:00.000+07:002005-04-13T19:49:00.000+07:00विजय जी,आप को शायद यह अविश्वसनीय लगे,कि पिछले तीन...विजय जी,<BR/>आप को शायद यह अविश्वसनीय लगे,कि पिछले तीन वर्षों में,जब से मैं यहाँ हूँ,<BR/>किसी ने भी , तमाम भिन्नताओं के होने के बावजूद, यहाँ के बारे में जानने की <BR/>कोई इच्छा प्रकट नहीं की ।<BR/>अब चूँकि,आपने इच्छा प्रकट की है,तो,हमारे लिए यह आदेश भी हुआ।<BR/>दो साल पहले,हम जैसे कुछेक लोगों ने,ऐसी ही इच्छा ,सन्युक्त राज्य अमरीका के बारे में<BR/>जानने के उद्देश्य से ,पोर्टलैण्ड ,के,एक वरिष्ठ और जान-पहचान के भारतीय मूल के एक सज्जन नागरिक के सामने रक्खी थी,जो,अभी तक,फलीभूत होने का इन्तजार कर रही है।<BR/>( श्री इंद्र अवस्थी ध्यान दें ।)<BR/>अतएव,मेरी ओर से,(यदपि प्रयास शीघ्र ही,लेख को पूरा करना होगा।) यदि ,यह प्रयास विलम्बित हो,तो,इसे,परम्परा का प्रतीक समझें।<BR/>आशा है, मैं यह प्रयास जल्दी ही,आप के सामने ला सकूँगा ।<BR/><BR/>-राजेशराजेश कुमार सिंहhttp://www.blogger.com/profile/07513885073414867392noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-8465817.post-1113267198597311412005-04-12T07:53:00.000+07:002005-04-12T07:53:00.000+07:00राजेश-जी:कभी बंदर लैंपंग के बारे में कुछ जानकारीपू...राजेश-जी:<BR/>कभी बंदर लैंपंग के बारे में कुछ जानकारीपूर्ण लेख लिखें। जानने की बड़ी इच्छा है।Vijay Thakurhttp://www.blogger.com/profile/15528692817447149135noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-8465817.post-1112703948186642622005-04-05T19:25:00.000+07:002005-04-05T19:25:00.000+07:00पंकज जी,और गुरुदेव,आप लोगों की मिलती-जुलती प्रतिक्...पंकज जी,और गुरुदेव,आप लोगों की मिलती-जुलती प्रतिक्रियाएँ पढ कर,हमें,दुष्यन्त कुमार का एक शेर याद आ गया:<BR/>"दुख को बहुत सहेज कर रखना पड़ा हमें,<BR/>सुख तो किसी कपूर की टिकिया सा उड़ गया ।"<BR/><BR/>प्रतिक्रियाओं के लिए धन्यवाद स्वीकार करें।<BR/><BR/>राजेशराजेश कुमार सिंहhttp://www.blogger.com/profile/07513885073414867392noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-8465817.post-1112456473803571732005-04-02T22:41:00.000+07:002005-04-02T22:41:00.000+07:00शुक्ला जी,किसे सुधार रहे हो। हम तो कभी कभी बोले है...शुक्ला जी,<BR/><BR/>किसे सुधार रहे हो। हम तो कभी कभी बोले हैं।<BR/><BR/>पंकजमिर्ची सेठhttp://www.blogger.com/profile/04315715383207912310noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-8465817.post-1112425846834380192005-04-02T14:10:00.000+07:002005-04-02T14:10:00.000+07:00रोने-धोने में ही सुख तलाशने की आदत कब छोड़ेगे, बबु...रोने-धोने में ही सुख तलाशने की आदत कब छोड़ेगे, बबुआ!अब तो बड़े बन जाओ.अनूप शुक्लाhttp://www.blogger.com/profile/07001026538357885879noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-8465817.post-1112392592167817922005-04-02T04:56:00.000+07:002005-04-02T04:56:00.000+07:00राजेश जी,बड़ी निराशाजनक कविता है लेकिन जिंदगी में ...राजेश जी,<BR/><BR/>बड़ी निराशाजनक कविता है लेकिन जिंदगी में ऐसे समय भी आते हैं और ऐसी कविताएं पढ़कर पता नहीं क्यूँ तसल्ली मिलती है।<BR/><BR/>पंकजमिर्ची सेठhttp://www.blogger.com/profile/04315715383207912310noreply@blogger.com