tag:blogger.com,1999:blog-8465817.post112004990472011484..comments2007-04-18T14:13:47.307+07:00Comments on कल्‍पवृक्ष: संकल्पराजेश कुमार सिंहhttp://www.blogger.com/profile/07513885073414867392noreply@blogger.comBlogger7125tag:blogger.com,1999:blog-8465817.post-1157553122113525512006-09-06T21:32:00.000+07:002006-09-06T21:32:00.000+07:00बहुत परिपक्व कविता . अच्छे से अच्छा कवि भी ऐसी कवि...बहुत परिपक्व कविता . अच्छे से अच्छा कवि भी ऐसी कविता लिख कर गर्व की अनुभूति कर सकता है . बधाई ! सचमुच बहुत अच्छी कविता .priyankarhttp://www.blogger.com/profile/08880916167683815784noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-8465817.post-1120811759740033432005-07-08T15:35:00.000+07:002005-07-08T15:35:00.000+07:00डा0 व्यॊम की समीक्षा पढ कर तॊ , मैं पुलकित हॊ उठा ...डा0 व्यॊम की समीक्षा पढ कर तॊ , मैं पुलकित हॊ उठा हूँ। क्या कहूँ , कैसॆ कहूँ ? समझ नहीं पा रहा हूँ । "अनुभूति" मॆं , पहलॆ भी रचनायॆं भॆजी थीं। पुन: भॆज रहा हूँ। प्रॆम कविताओं की श्रॆणी मॆं , इन्हॆं रख सकतॆ हैं या नहीं , यह तॊ निर्णायक ही निर्णय करॆं।<BR/>अनूप जी , आप कॆ सिर पर , प्रॆरणा का भार तॊ पहलॆ सॆ ही रहा है। प्रॊत्साहन कॆ लियॆ , आभार का भार , अब , आप कॆ कंधॊं पर टिका रहा हूँ। <BR/>अनुनाद जी , आप की बात सॆ मैं गहरा इत्तफाक रखता हूँ। बड़ॆ-बड़ॆ पुस्तक मॆलॊं मॆं भी , ऐसी सामग्री कॆ लियॆ , मैं बहुत भटकता रहा हूँ । समय-समय पर , यूँ ही , मार्गदर्शन दॆतॆ रहॆं। बल मिलता है।<BR/>आशीष जी का आशीष सिर-माथॆ पर। आशा है , आगॆ भी , "कल्पवॄक्ष" कॊ हर-भरा रखनॆ कॆ लियॆ , अपना आशीष बरसातॆ रहॆंगॆ। <BR/><BR/> <A HREF="http://abhipray.blogspot.com" REL="nofollow">"माजरॆ का दूसरा पहलू"</A>शीर्षक सॆ कुछ संस्मरण मैंनॆ <A HREF="http://abhipray.blogspot.com" REL="nofollow">यहाँ</A> लिखॆ हैं। इसॆ भी दॆखॆं (आप चाहॆं , तॊ इसॆ , लॆख का अ-व्यावसायिक विज्ञापन / विपणन कह लॆं ।)राजेश कुमार सिंहhttp://www.blogger.com/profile/07513885073414867392noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-8465817.post-1120390093809341512005-07-03T18:28:00.000+07:002005-07-03T18:28:00.000+07:00राजेश जी आपकी कविता पढ़कर लगा कि किसी मँजे हुए कवि ...राजेश जी आपकी कविता पढ़कर लगा कि किसी मँजे हुए कवि की कविता पढ़ रहा हूँ। बधाई आपको। लेखनी को निरन्तर गतिशील बनाये रखें। क्या आपने कोई प्रेम गीत भी लिखा है? यदि लिखा हो तो भेजें। अनुभूति पेर हिन्दी की सर्वश्रेष्ठ १०० प्रेम कविताओं का संकलन किया जा रहा है। यदि न देखा हो तो इसे अवश्य देखें। <BR/>डॉ॰ जगदीश व्योम<BR/>www.anubhuti-hindi.org<BR/>www.hindisahitya.blogspot.com<BR/>www.kavyakunj.blogspot.comडॉ॰ व्योमhttp://www.blogger.com/profile/10667912738409199754noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-8465817.post-1120389956926614512005-07-03T18:25:00.000+07:002005-07-03T18:25:00.000+07:00राजेश जी आपकी कविता पढ़कर लगा कि किसी मँजे हुए कवि ...राजेश जी आपकी कविता पढ़कर लगा कि किसी मँजे हुए कवि की कविता पढ़ रहा हूँ। बधाई आपको। लेखनी को निरन्तर गतिशील बनाये रखें। क्या आपने कोई प्रेम गीत भी लिखा है? यदि लिखा हो तो भेजें। अनुभूति पेर हिन्दी की सर्वश्रेष्ठ १०० प्रेम कविताओं का संकलन किया जा रहा है। यदि न देखा हो तो इसे अवश्य देखें। <BR/>डॉ॰ जगदीश व्योम<BR/>www.anubhuti-hindi.org<BR/>www.hindisahitya.blogspot.com<BR/>www.kavyakunj.blogspot.comडॉ॰ व्योमhttp://www.blogger.com/profile/10667912738409199754noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-8465817.post-1120125821891573432005-06-30T17:03:00.000+07:002005-06-30T17:03:00.000+07:00बहुत सही, काफ़ी दिनों बाद एक जोश भरी कविता पढ़ी। उम...बहुत सही, काफ़ी दिनों बाद एक जोश भरी कविता पढ़ी। उम्मीद है कि आपकी लेखनी चलती रहेगी।आशीषhttp://www.blogger.com/profile/15373573505567241038noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-8465817.post-1120102937636288052005-06-30T10:42:00.000+07:002005-06-30T10:42:00.000+07:00आपकी कविता बहुत अच्छी लगी । इसमें कुछ नयापन है ।मे...आपकी कविता बहुत अच्छी लगी । इसमें कुछ नयापन है ।<BR/><BR/>मेरी बहुत पुरानी लालसा है कि हिन्दी कविताओं में विविधता हो , कि सब लोग श्रूंगार और हुस्न का ही वर्णन न करें । कुछ बच्चों के लिये कविताये हों , कुछ प्रेरणा देने वाली ( मोटिवेशनल कवितायें ) हों , कुछ अच्छे मानवीय गुणो ( साहस , कर्म , धैर्य , उत्साह , स्वतन्त्रता आदि ) पर कवितायें हों । खुशी है कि अब विविधता के दर्शन होने लगे हैं ।<BR/><BR/>अनुनादअनुनाद सिंहhttp://www.blogger.com/profile/05634421007709892634noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-8465817.post-1120071056014788202005-06-30T01:50:00.000+07:002005-06-30T01:50:00.000+07:00वाह वाह क्या तेवर हैं । हम खुश हुये। ये तेवर बरकरा...वाह वाह क्या तेवर हैं । हम खुश हुये। ये तेवर बरकरार रखे जायें।बात जरा जल्दी-जल्दी कही जाये।अनूप शुक्लाhttp://www.blogger.com/profile/07001026538357885879noreply@blogger.com